समय का बदलाव 

15-02-2025

समय का बदलाव 

राजीव डोगरा ’विमल’ (अंक: 271, फरवरी द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

सब कुछ बदल जाता है 
वक़्त के साथ 
प्रतिष्ठा, परंपरा, मर्यादा 
मगर नहीं बदलता
व्यक्ति का व्यक्तित्व। 
 
सब कुछ चला जाता है 
वक़्त के साथ
अपने, पराये, हमराही
मगर नहीं जाता व्यक्ति का 
अपनेपन का वहम। 
 
सब कुछ खो जाता है 
समय के साथ 
बचपन, यौवन, पद 
मगर नहीं खोता 
अपनों के लिए दिया वक़्त। 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

नज़्म
कविता
बाल साहित्य कविता
सामाजिक आलेख
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में