एक नशा सा तारी है

01-07-2026

एक नशा सा तारी है

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 300, जुलाई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

एक नशा सा तारी है, 
अब ग़म की बारी है। 
  
वह हुए हैं मेहमान, 
किस की हिस्सेदारी है। 
 
वफ़ा है लटकी द्वार पर, 
सच्चाई कब से हारी है। 
 
मौक़ा नहीं था हँसने का, 
उसे परिवार की ज़िम्मेदारी है। 
 
ढकोसले हुए जाने कितने, 
वह पक्का व्यापारी है। 
 
डीलर भाई ने नाप दी, 
ज़मीन उसकी सारी है। 
 
थप्पड़ मार इल्ज़ाम उसी पर, 
आज की यही समझदारी है। 

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