एक हृदय टूक हुआ

01-07-2026

एक हृदय टूक हुआ

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 300, जुलाई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

एक हृदय टूक हुआ, 
एक आहत है मस्तिष्क। 
 
ओढ़ चाँदनी निकले वन को, 
घर पर छोड़ आएँ मन को। 
माटी से नाता कुम्हार का, 
ऐसा सपना रूठ गया, 
एक हृदय टूक हुआ। 
 
बाहर चलते श्वास, 
भीतर मृत चेतना। 
सिर झुका के रहता अब, 
समय ने भूलाया ऐंठना। 
आहार से भूख हुआ, 
एक हृदय टूक हुआ। 
 
एक हृदय टूक हुआ, 
एक आहत मस्तिष्क। 

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