अस्तित्व विहीन

01-06-2026

अस्तित्व विहीन

राजीव डोगरा ’विमल’ (अंक: 298, जून प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

बड़े-बड़े सिकंदर
यहाँ आये
मानते थे ख़ुद को
बड़े बलशाली धुरंधर। 
 
फिर भी बचा न सके
अपने अस्तित्व को
समेट लिया
मिट्टी ने अपने अंदर। 
 
ख़ुद को ख़ुदा जानते थे
मगर औरों को
सदा गधा पहचानते थे। 
 
ख़ुदा ने उनको भी
अपना अस्तित्व दिखा दिया
मिट्टी थे, मिट्टी में मिला दिया

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