आदेश

राजीव डोगरा ’विमल’ (अंक: 298, जून प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

श्मशान की राख को 
सीने से लिपटाए फिरता हूँ, 
महाकाल का भगत हूँ
उनका नाम लिए फिरता हूँ, 
मैं चुपचाप 
सभी की सुनता हूँ 
किसी को कुछ बोलता नहीं। 
 
आदेश है माँ महाकाली का
बेमतलब इसलिए
किसी को सताता नहीं। 
गुर्राता है कोई तो 
मैं चुप रहता हूँ
फिर भी बेमतलब किसी को 
मौत की नींद सुलाता नहीं। 
 
ख़ामोशियाँ है बहुत दफ़न 
मेरे इस सीने में
मगर अपनी माँ काली के अलावा
किसी को सुनाता नहीं। 

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