क्या कहूँ

01-02-2021

मैं क्या लिखूँ अपने बारे में
मुझे कुछ भी
समझ सा नहीं आता।
मेरा इल्म भी
फीका सा पड़ रहा है
तेरी यादों के आगे।
साथ छोड़ चुका हूँ
हर उस शख़्स का
जो तुमसे जुड़ा है।
मगर दिल की धड़कनों को
कैसे जुदा करूँ
जो तुमसे हर पल जुड़ी हैं।
बिखरे हुए वक़्त को भी
समेट लिया है मैंने
तेरी यादों के साथ।
मगर ख़ुद को कैसे समेटूँ
जो बिखर कर भी
सँभल नहीं पाया हूँ आज तक।

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