आदत है अब

01-09-2020

दर्द लिखने की आदत है अब
क्योंकि दर्द को
सहने की आदत हैं अब।
टूटकर बिखरा हूँ बहुत
मगर फिर भी
जीने की आदत है अब।
बहुत समझाया है सब को
मगर अब ख़ुद को
समझाकर चुपचाप
बैठने की आदत है अब।
अपनों को ग़ैर
ग़ैरों को अपना
बनाया है बहुत 
अब ख़ुद से और ख़ुदा से
रिश्ता निभाने की
आदत है अब।

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