शाश्वत प्रेम

01-02-2026

शाश्वत प्रेम

राजीव डोगरा ’विमल’ (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

तुम वो फूल हो
जिसको मैं बिना स्पर्श के
खिलता हुआ
और महकता हुआ
देखना चाहता हूँ। 
 
तुम मेरी वो
अधूरी ख़्वाहिश हो
जिसके पूरे होने का
इंतज़ार मैंने कई
युगों तक किया है। 
 
तुम मेरे जीवन का
वो अंतिम अध्याय हो
जिसके पूरा होने पर
शाश्वत आनंद
मुझे स्पर्श कर जाएगा। 

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