यूँ भी होता है

15-09-2026

यूँ भी होता है

मधु शर्मा (अंक: 302, सितम्बर द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

पल में हो जाये प्यार, यूँ भी होता है,
फिर रोज़ की तकरार, यूँ भी होता है।
 
तुम जग को भूले बना के जिन्हें अपना,
ख़ुशी में नाच रहे कि पूरा हुआ सपना,
इतना करो न एतबार, यूँ भी होता है,
धोखा दे जाएँगे ये यार, यूँ भी होता है।
 
पिता ने घरबार बेच जिन्हें विदेश भेजा,
उन बेटों ने उसका हाल तक न पूछा।
बिखरा भरापुरा परिवार, यूँ भी होता है,
अब सूना सा है संसार, यूँ भी होता है।
 
तिनका-तिनका जोड़ घर बनाया है,
दिल के कोने में कहीं डर समाया है,
पूछूँ ख़ुद से बारम्बार, यूँ भी होता है?  
क्या सपने होंगे साकार यूँ भी होता है?  
 
पल में हो जाये प्यार, यूँ भी होता है।
फिर रोज़ की तकरार, यूँ भी होता है।

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