दास्ताँ झूठों की

01-02-2026

दास्ताँ झूठों की

मधु शर्मा (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

दास्ताँ झूठों की सच्ची कहानी हो गई, 
सच बोलने वालों की बदनामी हो गई। 
 
बीतते ही बचपन के बुढ़ापे ने आ घेरा, 
न जाने बीच में कहाँ जवानी खो गई। 
 
बहुत खोजने पर घर उसका हमें मिला, 
निशानी थी जो बरसों में पुरानी हो गई। 
 
प्रेम कृष्ण-राधा का अधूरा ही रह गया, 
मीरा फिर भी कान्हा की दीवानी हो गई। 
 
बात-बात में ज़िद्द करने वाली वो बेटी, 
ब्याहते ही एक दिन में सयानी हो गई। 
 
क्या से क्या कर डाला है दहशतगर्दी ने, 
भले-चंगे पड़ोसियों में बदगुमानी हो गई। 

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