दर्पण

01-07-2026

दर्पण

मधु शर्मा (अंक: 300, जुलाई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

फ़ेलुन फ़ेलुन
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पाक सा तन है
साफ़ सा मन है।
 
भीतर झाँकूँ
इक दर्शन है।
 
डूब के उभरे
उसमें दम है।
 
गिर के उठना
उसका फ़न है।
 
साफ़ या मैला
वो दर्पण है।
 
नाम उसी के
सब अर्पण है।

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