जोड़ियाँ

मधु शर्मा (अंक: 294, मार्च द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

जोड़ियाँ बेशक आसमान से बनके आती हैं,
मिलजुलकर फिर अपना घर वे बसाती हैं,
अफ़सोस! ज़मीन पर पाँव टिकाते ही कुछ 
जीवन-साथी को घर से बेघर कर जाती हैं।

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता - क्षणिका
सजल
लघुकथा
कविता
चिन्तन
सांस्कृतिक कथा
कहानी
हास्य-व्यंग्य कविता
किशोर साहित्य कविता
काम की बात
नज़्म
ग़ज़ल
चम्पू-काव्य
किशोर हास्य व्यंग्य कविता
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
किशोर साहित्य कहानी
बच्चों के मुख से
आप-बीती
सामाजिक आलेख
स्मृति लेख
कविता-मुक्तक
कविता - हाइकु
पत्र
सम्पादकीय प्रतिक्रिया
एकांकी
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में