कैसे देखें 

15-03-2026

कैसे देखें 

मधु शर्मा (अंक: 294, मार्च द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

काश दिल रुक जाए धड़कते हुए, 
देखा न जाये रिश्ते यूँ बिगड़ते हुए। 
 
सी तो रहे ज़ख़्मों को बेतरतीबी से, 
देखेंगे कैसे कल उन्हें उधड़ते हुए। 
 
बरसों लगे जिस घर को बसाने में, 
कैसे देखें ग़ैरों के हाथ उजड़ते हुए। 
 
बाँट दी ज़मीन-जायदाद बच्चों में, 
नहीं देखना उन्हें मरते-झगड़ते हुए। 
 
देखा है उन्हें वही हाथ काटते हुए, 
सीखे थे चलना जिन्हें पकड़ते हुए। 
 
कहते थे मुँह में उसके ज़ुबान नहीं
ले देखें उसे बूढ़े ससुर से लड़ते हुए। 
 
दामन सच का पकड़े रहने वालों को, 
हमने देखा ताउम्र एड़ियाँ रगड़ते हुए। 

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