स्वर्ग की लोलुपता

01-02-2026

स्वर्ग की लोलुपता

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

स्वर्ग की लोलुपता, 
इस धरा को नरक बनाए है। 
 
बेहोशी में प्रयाण होगा, 
देख भी न पाओगे, 
जलाते हो निरीह को, 
ख़ुद भी जलाए जाओगे। 
एक प्रकृति की देह, 
किस किस को सताए है, 
इस धरा को नरक बनाए है। 
 
कमी नहीं कोई भी कारीगर की, 
यूँ ही काटते पिटते हो। 
स्वर्ग की मय के लिए, 
नाहक़ ही मरते हो। 
यहाँ तरसते रहे, 
वहाँ देखा किसने, 
सुख के रोट पाए है। 
 
स्वर्ग की लोलुपता, 
इस धरा को नरक बनाए है। 

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