शाम मुक्ति वाली है

01-02-2026

शाम मुक्ति वाली है

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

शाम मुक्ति वाली है, 
ध्यान की प्याली है। 
 
वह ज़मीन भी प्रभु की, 
छत जहाँ डाली है। 
 
वहाँ झाड़ झंकड़ उगते, 
प्लाट मन जो ख़ाली है। 
 
ध्यान रखना बग़िया का, 
संत तू ही माली है। 
 
प्रभु स्मरण ही सच्चा, 
मन एक नंबर का जाली है। 
 
उत्तर की आशा में जीव, 
बरसों से वह सवाली है। 
 
अद्वितीय है कोई और नहीं, 
तीर खाने वाला बाली है।

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