क्या मालूम! 

01-05-2026

क्या मालूम! 

मधु शर्मा (अंक: 296, मई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

कभी-कभार हमें जो दिखाई दे रहा है, असल में वह कुछ और ही होता है। 

कुछ उदाहरण:

  • हर वक़्त हँसने-हँसाने वाला इन्सान हँसमुख न होकर, क्या मालूम अपने भीतर समेटे ढेरों दुखों को दुनिया से छिपाने की कोशिश कर रहा हो! 

  • दिन चढ़े बिस्तर से निकल अपनी दिनचर्या शुरू करने वाला सुस्त न होकर, क्या मालूम नाइट-शिफ़्ट (रात की नौकरी) करता हो या अवसाद का शिकार हो! 

  • किसी से मेलजोल न रखने वाला इंसान अहंकारी या नामिलनसार न होकर, क्या मालूम अपनों से ही धोखा खाकर वह अब दूसरों से भी दूरी रखने लगा हो! 

  • पार्टियों, आयोजनों आदि में न आने-जाने वाला इन्सान रूखा या कंजूस न होकर, क्या मालूम एकांतप्रिय हो या भीड़-भाड़ से घबराता हो! 

  • ख़ुद को या अपना घर साफ़ न रखने वाला गंदगी का शौक़ीन न होकर, क्या मालूम किसी शारीरिक या मानसिक रोग से पीड़ित हो! 

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