बारिश और हवा

01-02-2026

बारिश और हवा

हेमन्त कुमार शर्मा (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

बारिश को सलाम किया। न भी करता तो चल जाता। पर एक शिष्टाचार भी होता है। इसी के चलते अभिवादन कर दिया। कल्लू की झोंपड़ी पानी से रिसने लगी थी। ठंड भी बड़ी तीखी थी। 

खोमचे वाला आज काम पर नहीं जा सका। सो दिहाड़ी का कोई सवाल नहीं था। उसकी झुग्गी थोड़ी ठीक थी। कल के लिए आज रेहड़ी लगानी थी। पर . . .

मोनू का घर ही नहीं था। इधर-उधर से कूड़े से कुछ प्लास्टिक आदि इकट्ठा कर खाने पीने का बंदोबस्त कर लेता। पर बारिश। 

फ़ुटपाथ पर सो नहीं सकता था। हवा भी ज़ोरदार थी। किसी बन्द दुकान के बादरे में रात बिताई पर दिन . . .

टोनी कुत्ते के पैर में चोट लग गई थी। वह बारिश से बचता फिर रहा था। भीगे शरीर का क्या करे? 

बड़े साहब भी परेशान थे। कार्यालय से छुट्टी ले ली थी। चाय की चुस्की लेते हुए कहा, “वाह! ऐसी ठंड बारिश ने नज़ारे दिला दिये।”

कहीं हिल स्टेशन पर घूमने की परिवार में चर्चा की। छुट्टी का आवेदन करने का मन बनाया। 

बुढ़ी गाय किसी पेड़ के नीचे खड़ी थी। और गोवंश भी आ गया था। सड़कों पर विचरण करते रहते। घर बार नहीं था इनका। शायद इकट्ठे रहने पर ठंड कम लगेगी। या शरीर सहन करने लगा था। 

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