मैं तूफ़ानों से निकला हूँ
मुझे आँधियों से 
अब कोई डर नहीं,
मैं महाकाल से मिला हूँ 
मुझे काल से 
अब कोई डर नहीं ,
मैं अपने अस्तित्व को
मिटा चुका हूँ,
मुझे जीवन से अब 
कोई मोह नहीं।
मैं माँ काली से प्रेम
पा चुका हुँ,
मुझे दुनिया वालों से 
अब कोई स्नेह नहीं।

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें