आधुनिक मुखौटा

01-07-2020

आधुनिक मुखौटा

राजीव डोगरा ’विमल’

कुछ यूँ बदला वक़्त की
सब कुछ बदलता चला गया।
ज़मीं ये आसमां और
आसमां से ज़मीं सब
कुछ यूँ ही बदलकर
बिखरता सा गया।


इस बदलते हुए वक़्त में
मैंने सोचा
शायद कोई तो मेरा होगा,
मगर आधुनिकता के नाम पर
मुखौटा पहने हुए लोगों ने
समझा दिया कि,
कोई अपना नहीं होता
यहाँ पर
सिवाय ज़रूरत के।

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