दिल से ग़ज़ल तक

दिल से ग़ज़ल तक  (रचनाकार - देवी नागरानी)

109. धरती माँ की लाज

 

धरती माँ की लाज बचाने
खेले ख़ून की होली दीवाने॥
 
बस जलना है शम’अ को फिर 
जलने आ जाते परवाने॥
 
देने आहुति वो अपनी
लाये जान के है नज़राने 
 
देख कली की रंगत निखरी
भँवरा आया है मंडराने॥
 
मैदाँ में सब आए ‘देवी’
अपना अपना रँग दिखाने॥

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