दिल से ग़ज़ल तक

 

122    122    122    122 
 
चमकती है बिजली यूँ बारिश के पहले
ज्यों निकले है चिंगारी आतिश के पहले 
 
थी बरसी वो रहमत भी ख़्वाहिश के पहले 
मिली नौकरी बस सिफ़ारिश के पहले
 
उठी मन में ख़्वाहिश वो नग़्मा सुना दे 
ग़ज़ल गा चुकी वो गुज़ारिश के पहले
 
जो सोचा, जो चाहा, हुआ कुछ न ऐसा
हुआ ख़त्म सब कुछ गुँजाइश के पहले
 
बचे कांड से, थी ये उसकी भलाई 
किया बाख़बर जिसने साज़िश के पहले
 
न मैंने कहा कुछ, न आँखें ही बोली
खुली पोल फिर भी नुमाइश के पहले 
 
जो है जानता हाल ‘देवी’ दिलों का
वो दे हौसला आज़माइश के पहले

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