दिल से ग़ज़ल तक

 

122    122    122    122 
 
नये साल का है आना मुबारक
नये दोस्तों से यूँ मिलना मुबारक
 
उम्मीदों पे पूरा उतरता है गर वो 
नये साल का फिर तो आना मुबारक 
 
नये साल के जो परिंदे नये हैं 
मुबारक उन्हें आशियाना मुबारक
 
इन्हीं रास्तों पर कई मोड़ आए 
जहाँ सीखकर कुछ सिखाना मुबारक
 
यक़ीनन भुला देगी दुनिया इसे फिर 
मगर जो बना वो फ़साना मुबारक
 
बसी हैं जो भीतर दिलों में वो यादें 
उन्हें भी हो उनका ठिकाना मुबारक
 
हुई गुफ़्तगू तुमसे मेरी है जब से 
मिला है ख़ुशी का बहाना मुबारक
 
लिखा मैंने मतला ग़ज़ल का जो ‘देवी’
तेरा उसको यूँ गुनगुनाना मुबारक

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