दिल से ग़ज़ल तक

 
रहमत तेरी ए मौला अगर बेकराँ रहे
अल्लाह मेरे मुल्क में अम्नो-अमाँ रहे
 
महफ़ूज़ हर बला से मेरा आशियाँ रहे
फटके न पास, दूर ही बर्के-तपाँ रहे
 
चाहे ज़बाँ पे लाख तेरी बन्दिशें लगें
ख़ामोश लब यहाँ पे हों चर्चा वहाँ रहे
 
नज़रों में गुलफ़िशां रहे वो इक जहान के
नस-नस में सोज़े-दिल का भी आतिशफ़िशां रहे
 
दिल में हो दर्द और तब्बसुम लबों पे हो 
हर आने वाले पल में ये दिल शादमां रहे
 
आतिशफ़िशां=ज्वालामुखी, आग बिखेरना वाला, शादमाँ=प्रसन्न

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