दिल से ग़ज़ल तक

 

2122    1212    22 
 
धर्म-ईमान सब जला क्या है 
भूख भी आग के सिवा क्या है? 
 
जो है चंगुल में अब फ़रेबों के 
उन से जा पूछिए, दग़ा क्या है? 
 
सारी ख़ुशियाँ लगे अपाहिज सी 
सीना पीटे है ग़म, हुआ क्या है? 
 
जब बिछी है बिसात रिश्तों की 
सब लगा दाँव पर, बचा क्या है? 
 
ठंडे चूल्हे रहे थे जिस घर के 
उससे पूछा गया, “पका क्या है?” 
 
बदली हर बार कुर्सियाँ ‘देवी’ 
ये न पूछो बदल रहा क्या है? 

<< पीछे : 106. इस देश से ग़रीबी हट कर न… आगे : 108. दुलारा बापू >>

लेखक की कृतियाँ

बाल साहित्य कविता
ग़ज़ल
आप-बीती
कविता
साहित्यिक आलेख
कहानी
अनूदित कहानी
पुस्तक समीक्षा
बात-चीत
अनूदित कविता
पुस्तक चर्चा
विडियो
ऑडियो