दिल से ग़ज़ल तक

दिल से ग़ज़ल तक  (रचनाकार - देवी नागरानी)

102. उठो सपूतो देश के आओ 

 

उठो सपूतो देश के आओ
देश का गौरव आप बढ़ाओ
 
ख़ूब हो सोए अब तो जागो
ममता का अब क़र्ज़ चुकाओ
 
देश की बेटी अपनी बेटी
उसकी मौत का शोक मनाओ
 
नारी की है माँग सुरक्षा
नारों से अब मत भरमाओ
 
नारों से क्या होगा लोगो
नारी को सम्मान दिलाओ
 
माँ वो, बहन है बेटी ‘देवी’
मान उसे दो ख़ुद भी पाओ

<< पीछे : 101. ‘हम हैं भारत के’ बताकर एक… आगे : 103. अर्पण कर दें तन मन जान  >>

लेखक की कृतियाँ

बाल साहित्य कविता
ग़ज़ल
आप-बीती
कविता
साहित्यिक आलेख
कहानी
अनूदित कहानी
पुस्तक समीक्षा
बात-चीत
अनूदित कविता
पुस्तक चर्चा
विडियो
ऑडियो