दिल से ग़ज़ल तक

 
पहचानता है यारो, हमको जहान सारा
हिंदोस्ताँ के हम है, हिंदोस्ताँ हमारा
 
यह जँग है हमारी, लड़ना इसे हमें है
यादें शहादतों की देगी हमें सहारा
 
इस मुल्क के जवाँ सब, अपने ही भाई बेटे
करते हैं जान कुर्बाँ, जब देश ने पुकारा
 
जो भेंट चढ़ गए हैं, चौखट पे ज़ुल्मतों की
बलिदान से ही उनके, ऊँचा है सर हमारा
 
महफ़िल में दोस्तों की आते नज़र नहीं वो
दिल आशना हमारा, राजीव जाँ से प्यारा
 
थे कौन से शिकंजे, जिसने उसे था घेरा 
लड़ता रहा वो उनसे, जब तक नहीं वो हारा
 
लड़ते हुए मरे जो, उनको सलाम मेरा 
निकला जुलूस उनका, वो याद है नज़ारा
 
मिट्टी के इस वतन की, देकर लहू की ख़ुशबू
ममता का क़र्ज़ ‘देवी’ वीरों ने है उतारा

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