दिल से ग़ज़ल तक

 

“हम हैं भारत” देश की शान
अर्पण कर दें तन मन जान 
 
भारत माँ है जननी हमारी 
हम उसकी लायक़ संतान
अर्पण कर दें तन मन जान 
“हम हैं भारत” देश की शान
अर्पण कर दें तन मन जान 
 
देश की ख़ातिर जीना शान
देश की ख़ातिर मरना शान
जिससे कम हो शान वतन की
ऐसा करें न कुछ नादान
अर्पण कर दें तन मन जान 
 
जात न पात, न बोली, मज़हब
कोई भेद न भाव यहाँ
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई
भाई भाई एक समान 
अर्पण कर दें तन मन जान 
 
“आज़ादी” अधिकार हमारा
यही तिलक की आन व् बान 
उसकी ख़ातिर नेताजी ने
कर दी अपनी जाँ क़ुरबान
अर्पण कर दें तन मन जान 
 
सत्य अहिंसा, प्रेम व शान्ति 
गाँधीजी का था फ़रमान
दुनियाँ को इक मार्ग दिखाए
देश मेरा यह हिंदुस्तान 
अर्पण कर दें तन मन जान
 
गंगा जिसमें बहती ‘देवी’
भारत मेरा देश महान
उस मिटी का तिलक सजाऊँ
माथे पर मैं चँदन मान
अर्पण कर दें तन मन जान 
“हम हैं भारत” देश की शान

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