दिल से ग़ज़ल तक


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लगती है मन को अच्छी, शाइर ग़ज़ल तुम्हारी
आवाज़ है ये दिल की, शाइर ग़ज़ल तुम्हारी
 
ये नैन-होंठ चुप है, फिर भी सुनी है हमने
उन्वां थी गुफ़्तगू की, शाइर ग़ज़ल तुम्हारी
 
ये रात का अँधेरा, तन्हाइयों का आलम
ऐसे में सिर्फ़ साथी, शाइर ग़ज़ल तुम्हारी
 
नाचे हैं राधा मोहन, नाचे है सारा गोकुल
मोहक ये कितनी लगती, शाइर ग़ज़ल तुम्हारी
 
है ताल दादरा ये, और राग भैरवी है
सँगीत ने सजाई, शाइर ग़ज़ल तुम्हारी
 
मन की ये भावनायें, शब्दों में हैं पिरोई
है ये बड़ी रसीली, शाइर ग़ज़ल तुम्हारी
 
अहसास की रवानी, हर एक लफ़्ज़ में है
है शान शायरी की, शाइर ग़ज़ल तुम्हारी
 
अनजान कोई रिश्ता, दिल में पनप रहा है
धड़कन ये है उसीकी, शाइर ग़ज़ल तुम्हारी
 
दो अक्षरों का पाया जो ग्यान तुमने ‘देवी’
उससे निखर के आई, शायर ग़ज़ल तुम्हारी

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