दिल से ग़ज़ल तक


दर्द की तानें उड़ायेगी ग़ज़ल
इक अजब ख़ुश्बू लुटायेगी ग़ज़ल
 
जब भी आयेगी इधर बादे-सबा
नकहतें सहरा में लायेगी ग़ज़ल
 
हैं लबों पर गुल खिले मुस्कान के
फूल से नग़्मे सुनायेगी ग़ज़ल
 
नफ़रतों की मार से घायल हुए
प्यार का मरहम लगायेगी ग़ज़ल
 
टूटे रिश्तों से बढ़ी वीरानगी
ज़ीस्त को गुलशन बनायेगी ग़ज़ल
 
होगी रौशन ये अँधेरी बस्तियाँ 
जब भी ’देवी’ गुनगुनायेगी ग़ज़ल

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