दिल से ग़ज़ल तक

 

122    122    122    122
 
बने बेवफ़ा राज़दाँ देखो कैसे 
हुई दोस्ती रायगां देखो कैसे 
 
दलीलों के दरवाज़े चौड़े हुए हैं
सच्चाई हुई है अयाँ देखो कैसे
 
मुझे देखकर मुस्कराते थे कल जो
हुए आज वो बदगुमाँ देखो कैसे
 
नज़र अपनी अपनी, नज़रिया भी अपना
करे लोग उनको बयाँ देखो कैसे
 
कली को जो सींचे, वही उसको नोचे
मिले है यहाँ बागबाँ देखो कैसे
 
अलग है ज़बानें अलग लोग ‘देवी’
समझते उन्हें बेज़ुबां देखो कैसे
 

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