दिल से ग़ज़ल तक

दिल से ग़ज़ल तक  (रचनाकार - देवी नागरानी)

24. शायरी इक इबादत है


 
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शायरी इक इबादत है
देती दिल को ये राहत है
 
क्या क़लम का है जादू ये 
या ये रब की इनायत है
 
शब्द जैसे धड़कते हों
कितनी इनमें नज़ाकत है
 
वो है मुन्सिफ़ वही ज़ामिन
दिल ही उसकी अदालत है
 
है करम हमपे मौला का
करता वो ही हिफ़ाज़त है
 
रहमतों की है बारिश ये
आज ‘देवी’ सलामत है

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