दिल से ग़ज़ल तक

 

‘हम हैं भारत के’ बताकर एक फिर से हो गए
गीत ‘वैष्णव जन’ का गाकर एक फिर से हो गए
 
मातृभूमि ही वतन है, मातृभाषा माँ हमार
लोग नारा यूँ लगाकर एक फिर से हो गए
 
कोई चारा जब न था तब भाईचारा था वहाँ
हिंदू मुस्लिम कर मिलाकर एक फिर से हो गए
 
हम हैं भाई भाई कहके जब गले मिलने लगे 
नफ़रतें सारी भुलाकर एक फिर से हो गए
 
दूरियाँ नज़दीकियाँ सब स्वाहा होकर रह गईं 
बस्तियाँ फिर से बसाकर एक फिर से हो गए 
 
क्रूरता का सामना बेबस करें, कैसे कहो
रंजिशें अपनी भुलाकर एक वे फिर हो हो गए 
 
थी परस्पर साथ में मंदिर के मस्जिद भी वहाँ 
दोनों के दिलदार-दिलबर एक फिर से हो गए
 
एकता के सात सुर हर भाषा में बजने लगे 
सुर से सुर ‘देवी’ मिलाकर एक फिर से हो गए

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