दिल से ग़ज़ल तक

 
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भीड़ में वो सदा रहा तन्हा
दर्द का कारवाँ चला तन्हा
 
दर्द को दी पनाह सीने में
फिर भी वो क्यों मचल रहा तन्हा
 
बेअसर है हुआ ये दर्द मेरा 
बूँद-बूँद अब है बहा तन्हा
 
दर्द से मिल गई नजात मगर 
दिल से रख रख धुआँ उठा तन्हा
 
नामुराद ऐसा दर्द है ‘देवी’
दर्द ही दर्द की दवा तन्हा

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