दिल से ग़ज़ल तक

 

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वहीं पे आता उबाल होगा
जहाँ कहीं खून लाल होगा
 
हुआ न उसका यूँ हाल होगा
बना किसी की वो ढाल होगा
 
समाज हमसे, समाज से हम
उठेगी उंगली सवाल होगा
 
जवान लड़की गई जो घर से
न लौटेगी तो बवाल होगा
 
‘कहाँ गई वो, कहाँ गई वो’
हर एक का ये सवाल होगा
 
मिला के आंखें चुरा ले काजल
जो होगा शातिर कमाल होगा
 
था बेगुह वो फँसा गुनह में 
बिछाया दुश्मन ने जाल होगा
 
करे है पूरा जो फ़र्ज़ ‘देवी’ 
ज़रूर माँ का वो लाल होगा
 

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