दिल से ग़ज़ल तक

दिल से ग़ज़ल तक  (रचनाकार - देवी नागरानी)

108. दुलारा बापू

 
लाठ लँगोटी वाला बापू
हर दिल का दिलदार रहा॥
 
देश दुलारे बापू जी का
जनता से अति प्यार रहा॥
 
हिंसा के मारग का खंडन
अहिंसा का प्रचार रहा॥
 
फिरंगियों की बनी जो चीज़ें 
गाँधी का बहिष्कार रहा॥
 
शस्त्र बिना जो लड़ी लड़ाई 
“सत्याग्रह” हथियार रहा॥
 
रहनी करनी उनकी ऐसी
ज्यूँ गीता का सार रहा॥
 
प्रार्थना में निश्चय ‘देवी’
जीवन का शृंगार रहा॥

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