इश्क़ 

धीरज पाल (अंक: 283, सितम्बर प्रथम, 2025 में प्रकाशित)

 

इश्क़ की एक बूँद नहीं 
पूरा समंदर चाहिए
चाँद की पुलकित रोशनी सी 
हिम सा सम्पूर्ण ठंडक
मार्तंड की शुचि ज्वाला सी 
लैला का शत प्रतिशत निचोड़
और बदन का पूरा नमक चाहिए
मेरे महबूब मुझे इश्क़ बवाल चाहिए। 

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