अपने शब्दों की खोज 

01-07-2026

अपने शब्दों की खोज 

अभिषेक पाण्डेय (अंक: 300, जुलाई प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

मिट रहे हैं शब्द 
मिटेंगे अर्थ 
तपते हुए अंगारों 
और हमारे बीच 
नहीं बचेगी कोई आड़ 
केवल एक ईमानदार दुख 
भींच लेगा हमें अपने अन्दर 
फिर पैदा होंगे अर्थ 
मिलेंगे शब्द 
जो कभी नहीं मिटेंगे। 

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