पिता

अभिषेक पाण्डेय (अंक: 288, नवम्बर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

पिता 
अपने पितापन के अलावा 
और क्या है? 
 
सोचता हूँ 
यदि किसी दिन 
गेंद फेंकूँ
पिता की ओर 
क्या वे दौड़ पड़ेंगे 
उसे लपकने के लिए? 
 
या सुबह-सुबह 
चिड़ियों की चहक के बीच 
बेझिझक कहेंगे 
तुम्हारी माँ बहुत मीठा गाती थी 
 
या त्योहार के एक दिन पहले 
हमारे साथ 
पिता भी साफ़ कर रहे होंगे
अपने सफ़ेद अँगोछे से 
कोई पुरानी तस्वीर
 
मैं इंतज़ार में हूँ
हमारी न्यूनतम दूरी के 
जब पिता क्षण भर को युवा होंगे
या मैं कुछ देर को थकूँगा। 

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