ईश्वर 

अभिषेक पाण्डेय (अंक: 292, जनवरी द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

हर परे को थामे हुए है ईश्वर 
जब तक पंक्षियों का सर 
आकाश को न छुए 
तब तक 
आकाश में ही रहेगा ईश्वर 
लौटती हुई बकरियों के झुण्ड 
और रात के बीच 
ईश्वर का ही घर है 
जब तक कविता के आगमन का 
समय निश्चित न हो जाए 
तब तक 
मुझे ईश्वर को मानना ही पड़ेगा

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