उसी दिन मरना चाहता हूँ मैं

01-01-2026

उसी दिन मरना चाहता हूँ मैं

अभिषेक पाण्डेय (अंक: 291, जनवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

जिस दिन पहाड़ की पीठ पर 
पहली खरोंच पड़े 
उसी दिन 
मरना चाहता हूँ मैं
 
जिस रोज़ सूरज को छिपने के लिए 
दिन को कपड़े बदलने के लिए 
कोई ओट न मिले 
उसी दिन 
मरना चाहता हूँ मैं 
 
जिस दिन 
न बचे ऊँचाई का अनुभव
आँखों की दूरबीन टूट जाए
उसी दिन 
मरना चाहता हूँ मैं
 
नदी बनने के लिए 
जिस दिन न बचा हो 
बर्फ़ का कोई टुकड़ा
हवा को खटखटाने के लिए
कोई ऊँचा दरवाज़ा शेष न बचे
खो गया कविता का शब्द
जिस दिन कहीं से टकराकर
लौट न सके
उसी दिन 
मरना चाहता हूँ मैं

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
स्मृति लेख
गीत-नवगीत
कविता - क्षणिका
हास्य-व्यंग्य कविता
कविता - हाइकु
कहानी
बाल साहित्य कविता
किशोर साहित्य कविता
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में