नया स्वप्न 

01-02-2026

नया स्वप्न 

अभिषेक पाण्डेय (अंक: 293, फरवरी प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

हे मृत्यु! 
लिखता हूँ मैं जीवन 
तुम्हारे आधे ‘त’ के सामने 
खड़ा करता हूँ पूरा ‘व’
दर्पण के अंदर 
छुपी हुई छायाओं को 
निकालता हूँ बाहर
दिशा की आँखों के जल में 
तैराता हूँ
फिर नया स्वप्न
श्मशान की बुझी हुई राख से 
बटोरता हूँ कुछ चिंगारियाँ
पुंजीभूत करता हूँ उन्हें
उस दिशा में 
हाँ, उसी दिशा में! 

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