माँ 

अभिषेक पाण्डेय (अंक: 298, जून प्रथम, 2026 में प्रकाशित)

 

कल रात तुम आई 
मैं तुकबंदियों में व्यस्त था 
 
तुमने मुझे धीरे से छुआ 
मेरी जड़ता को कुछ नहीं हुआ 
 
तुमने मेरे सिर को सहलाया 
कुछ सफ़ेद बालों को अंगुराया 
 
तुमने कितना कुछ पूछा 
मुझे ही कुछ नहीं सूझा 
 
तुम्हारा आना इतना अप्रत्याशित रहा 
कि मुझे अंत तक लगा 
कि तुम आई ही नहीं॥

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