जो होली में घर नहीं गए 

15-03-2026

जो होली में घर नहीं गए 

अभिषेक पाण्डेय (अंक: 294, मार्च द्वितीय, 2026 में प्रकाशित)

 

वे होली में घर नहीं गए 
अभी भी ईंटें पाथ रहे हैं 
बिना रुके 
लगातार 
 
वे ईंटों की कच्ची गुझियाँ में 
बड़े उत्साह से साँचा लगा रहे हैं 
ईंटें पका रहे हैं 
और चिमनी से उठते धुएँ को 
ऊपर-ऊपर और ऊपर उठते देख रहे हैं 
 
वे हमारी कविता में नहीं आए 
क्योंकि वे ईंटें पाथ रहे हैं 
खच्चरों को गाड़ी में नांथ रहे हैं 
वे दूसरे के निशान पर 
अभी भी गोली दाग़ रहे हैं! 

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