हिंदी दिवस पर 

15-10-2025

हिंदी दिवस पर 

अभिषेक पाण्डेय (अंक: 286, अक्टूबर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

मैंने अपनी गालियाँ और अभिवादन तुझमें ही बरते हैं 
मेरे क्रोध और हर्ष तेरी ही ईंटों से बने हैं 
मेरे सारे पक्षी तेरे ही आकाश तले उड़ते हैं 
मैं तेरा दिवस नहीं मनाता माँ! 
क्योंकि मुझमें तेरी रात कभी नहीं होती॥

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