अपनी भाषा 

15-11-2025

अपनी भाषा 

अभिषेक पाण्डेय (अंक: 288, नवम्बर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

कितने दिन बाद 
कुछ लिखा है 
अपनी भाषा में 
कितने महीने 
कितने सप्ताह 
कितने घंटे 
कितनी घुटन के बाद 
फेफड़ों तक पहुँची है 
एक ताज़ी साँस 
 
कितने समय बाद 
माँ की तस्वीर से 
जाला साफ़ किया है 
 
मीलों सफ़र के बाद 
गाड़ी रोकी है 
एक चिरपरिचित रेस्टोरेंट के पास 
 
कितने ऐक्सप्रेस वे पार करने के बाद 
दिखी है मुझे 
गोद की तरह फैली 
गाँव की तरफ़ जाती सड़क 
 
कितनी देर बाद
किसी शब्द ने बुलाया है 
मुझे मेरे नाम से 
 
मैं ख़ुद को उतारकर 
बहुत दिन बाद 
नहाया हूँ 
अपनी भाषा के सरोवर में। 

0 टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी
स्मृति लेख
गीत-नवगीत
कविता - क्षणिका
हास्य-व्यंग्य कविता
कविता - हाइकु
कहानी
बाल साहित्य कविता
किशोर साहित्य कविता
विडियो
ऑडियो

विशेषांक में