कविता 

अभिषेक पाण्डेय (अंक: 288, नवम्बर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

कविता 
क्रांतिकारी न बन पाने की असमर्थता है 
कविता 
आत्मा और स्वार्थ के मध्य भाषा का एक फुटहा पुल है 
कविता 
ऊँचाई से आग तापते हाथों में आई ज़रा सी गर्मी है 
कविता
तूफ़ान में अंतरिक्ष की ओर ताकती एक जंग लगी डिश है। 

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