भविष्य की पत्नी के प्रति

15-11-2025

भविष्य की पत्नी के प्रति

अभिषेक पाण्डेय (अंक: 288, नवम्बर द्वितीय, 2025 में प्रकाशित)

 

मेरी सारी प्रेम कविताएँ 
तुम्हारे लिए नहीं थी 
हाड़-मांस की किसी स्त्री के लिए नहीं थी 
प्रेम को कल्पना मानना पड़ा है मुझे 
इस रिक्त संसार में 
 
किसी भी रंग से 
तुम्हारी साड़ी न मिलेगी
यहाँ सूरज के अतिरिक्त
किसी का कोई रंग नहीं है 
 
संक्षेप में इतना समझ लो 
मेरा वर्तमान
तुम्हारे भविष्य को पुकार रहा है! 

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