यान के इंतज़ार में चंद्र सुंदरी

15-08-2019

यान के इंतज़ार में चंद्र सुंदरी

डॉ. अशोक गौतम

यह क़िस्सा उसके बाद का है जब अवैध धंधों और संबंधों के अनगिनत तमगों के विजेता इंस्पेक्टर मातादीन चाँद प्रशासन के आग्रह पर उनके पुलिस विभाग में क्रांतिकारी सुधार लाने के इरादे से पुलिस सेवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत अपनी सरकार द्वारा डेपुटेशन पर चाँद भेजे गए थे और चंद दिनों में ही उन्होंने वहाँ के पुलिस विभाग में ऐसे ऐसे क्रांतिकारी सुधार कर डाले थे कि वहाँ की सरकार को पूरे चंद्रलोक के हाथ जोड़ उन्हें वहाँ से समय से पहले ही उनका डेपुटेशन ख़त्म कर सादर वापस भेजना पड़ा था। 

चाँद पर भी तब पुश्तों तक न मिटने वाली अपनी अमिट कार्यकुशलता की छाप छोड़ वे वहाँ की क़ानून व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार कर अपने देस लौट तो आए थे, पर उसके बाद की कहानी का कम ही पाठकों को पता होगा कि उन्होंने चाँद पर सुधारों के साथ और क्या गुल खिलाए थे? 

जब वे चाँद पर उस दिन वहाँ की पुलिस की क्लास लगाने के बाद थके-माँदे घूमने निकले तो अचानक उनकी नज़र चाँद की एक सुंदरी पर पड़ी गई। उस सुंदरी पर नज़र पड़ते ही वे ये भूल गए थे कि वे अपने देस में नहीं, चाँद पर हैं। एकाएक तब उन्हें फ़ील हुआ ज्यों वे चाँद पर नहीं, उस वक़्त भी ज्यों अपने देस में ही हों। ये फ़ील होते ही उन्होंने सुंदरी को बिना किसीकी परवाह किए तोला तो उन्हें लगा, काम बन सकता है। और वे क़ानून के तमगे कंधों से निकाल अपनी जेब में डाल उसके पीछे हो लिए, मूँछों को ताव देते, उसे सुरक्षा देने के बहाने। उसका पीछा करते करते वे ये भी भूल गए कि वे उनके पद का रौब दिखाकर हर दुकान से साधिकार सामान उठाने वाली बीवी के साथ ही साथ चार बच्चों के बाप भी हैं। असल में पर उन पर काम का लोड इतना है कि वे जब भी काम से चूर होकर वे किसी सुंदरी को देखते हैं तो और कुछ भूलें या न, पर यह ज़रूर भूल जाते हैं कि वे अपने से भी चार क़दम आगे की खाऊ बीवी सहित चार नालायक बच्चों के बाप हैं। 

तो अपने एमडी साब! चाँद पर होने के बाद भी पहली ही नज़र में उसे देखते फिर भूल गए कि वे अपने देस में अपनी बीवी बच्चों को छोड़कर आए यहाँ के राज अतिथि हैं। वे ये भी भूल गये कि अपने देस में कुछ भी ऊट-पटांग करो तो अपनी ही बदनामी होती है, परंतु यहाँ कुछ ऐसा वैसा करेंगे तो उनकी नहीं, पूरे देस की बदनामी होगी। फिर वे सोचे राज अतिथि के दिल नहीं होता क्या? शादीशुदा होने के बाद भी क्या उसका मौलिक हक़ नहीं कि वह अवसर सुअवसर मिलते आँखें चार करें? 

एमडी साब को यह भी पता था कि चाँद पर उनके परिवार के बारे में जानने वाला कोई नहीं। और जो कोई उनसे उनके परिवार के बारे में पूछे भी तो वे बताने वाले बिल्कुल नहीं। हर कोई अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मार सकता है, पर कम से कम एक पुलिसवाला तो बिल्कुल नहीं मार सकता।

एमडी साब का मानना है कि हर सुंदरता वाली चीज़ पर पहला हक़ क़ानून वालों का ही होता है। क़ानून उसके साथ सुरक्षा के बहाने वह सब कुछ मज़े से कर सकता है जो.…

तो पाठको! बहुत कम पाठकों को इस बात का इल्म होगा कि वहाँ पर उनके एक विवाहित सुंदरी से संबंध हो गए थे। दोनों शादीशुदा थे, सो दोनों ने एक दूसरे से एक दूसरे के पति, पत्नी के बारे में क़तई नहीं पूछा। और जिस तरह वे अपने को रिश्वत लेने से लाख हाथ पीछे खींचने के बावजूद भी रोक नहीं पाते थे, उसी तरह उस चंद्र सुंदरी को प्रेम सुरक्षा प्रदान करते-करते वे अपने को उसके आँचल में जाने से बचा नहीं पाए। 

और नतीजा! वहाँ की पुलिस व्यवस्था में क्रांतिकारी सुधार लाते-लाते वे अपने देस का एक जीव उस सुंदरी की कोख में रोपित कर आए। 

इधर वे वापस अपने देस तो आ गए पर चंद्रलोक की उस सुंदरी से उनकी एक और संतान ने जन्म ले लिया। मातादीन उर्फ एमडी साब वहाँ से आते-आते सुंदरी को वचन दे आए थे कि ज्यों ही धरती से अपने देश का कोई चंद्रयान अपनी सरकार द्वारा यहाँ भेजा जाएगा, तो उसमें वे दोनों की सीट एडवांस में बुक करवा देंगे। पर हुआ यों कि इस बीच अपने देश को कोई चंद्रयान चाँद पर न भेजा जा सका। 

उधर भारत से चाँद पर भेजे जाने वाले चंद्रयान की बाट जोहती-जोहती वह सुंदरी सुंदर होने के बाद भी उम्र दराज़ होने लगी तो एमडी साब का चाँद पर जन्मा बेटा पल छिन बड़ा। 

जब मातादीन का चाँद पर जन्मा बेटा सोचने समझने लायक़ हुआ तो एक दिन वह अपनी माँ से पूछा बैठा, “माँ! मेरे डैड कहाँ रहते हैं? मुझे मेरे डैड दिखाओ न!” तो उस सुंदरी ने धरती की ओर उँगली लगाकर उससे कहा, “बेटा! तेरे डैड वहाँ रहते हैं।”


“इत्ती दूर? इत्ती दूर वे क्या करते हैं?” एमडी साब के पता नहीं कितनवें बेटे ने अपनी माँ से पूछा तो वह उदास हो बोली, “वहाँ वे पुलिस विभाग में नौकरी करते हैं।”

“तो वे यहाँ क्यों नहीं नौकरी करते?”

“यहाँ ऊपर की कमाई के स्कोप नहीं है न बेटे!” तब बेटे ने ज्यों ही अगला प्रश्न अपनी माँ से पूछा तो माँ ने उसे चुप करा दिया। ऐसे ही एमडी साब के बेटे को जब भी मौक़ा मिलता, वह अपने डैड के बारे कुछ न कुछ ज़रूर पूछता। अपने डैड की शक्ल के बारे में पूछता। पर सुंदरी हर बार उसे उसके डैड का नाम एमडी साब बता कर जैसे कैसे उसे चुप करा देती।

एक दिन फिर एमडी साब के बेटे ने अपनी माँ से कहा कि वह जो उसे उसके डैड नहीं दिखा सकती तो न सही। कम से कम उसकी फोटो ही बता दे, तो यह सुन वह विवाहिता सुंदरी एक बार पुनः चुप हो गई। असल में पहले पति के डर से उसने एमडी साब की फोटो केवल अपने दिल में ही रखी थी।

यों ही दिन...महीने... साल बीतते गए। और बेचारी सुंदरी! अपने देस से आने वाले चंद्रयान का इंतज़ार करती बूढ़ी होने लगी। 

चंद्रलोक में जब भी कोई यान उतरता तो वह सारे काम छोड़ दौड़ कर उस यान के पास आ जाती। उसे लगता कि यह यान भारत से आया होगा। पर जब वह उस पर अमेरिका, चीन, रूस या किसी अन्य देश का लगा झंडा देखती तो उदास हो जाती। 

...और एक दिन! अपने देस का चंद्रयान चंद्रमा की ओर कूच कर गया। एमडी साब ने ज्यों ही जिमखाना जाते-जाते इस बात की ख़बर चंद्रलोक की अपनी आठवीं इलीगल बीवी को दी तो वह पागल हो गई। उसका मन किया कि वह चाँद पर से उसी वक़्त पृथ्वी पर छालाँग लगा दे। एमडी साब ने फोन पर दिल फेंकते उसे बताया कि उसने उन दोनों के लिए अपने चंद्रयान में वापसी का टिकट बुक करवा दिया है तो फोन पर ही चंद्रसुंदरी ने एमडी साब से पूछा, “हे मेरे दूसरे प्राणनाथ! पर हम धरती पर आकर रहेंगे कहाँ? आपके पुराने घर में हमारे आने पर दंगा फ़साद हो गया तो? एक ही घर में बीवी और सौत अपने-अपने बच्चों के साथ रह पाएँगी क्या?” तो उन्होंने काली की मूँछों पर ताव देते, पैंट से फुट भर बाहर निकल आए पेट बैल्ट कस उसे भीतर करते कहा, “डरो मत डार्लिंग! तुम्हारा एमडी साब इंस्पेक्टर से एसपी हो गया है। अब बड़े-बड़े शरीफ़ों से उसके पारिवारिक संबंध हो गए हैं। दिल्ली में ही उसके पॉश एरिया में दस बेनामी फ़्लैट हैं। मन करे तो रोज़ फ़्लैट बदलते रहना। क्या मजाल जो दूसरी बीवियों को इसकी भनक भी लग जाए कि तुम चाँद पर से आ गई हो। और हाँ! आते-आते आईजी साहब की बेगम को चाँद पर से एड़ी चमकाने वाला बिल्कुल वैसा ही पत्थर ज़रूर लाना। कह रहे थे कि यार! उस पत्थर से बेगम ने जब एड़ियाँ रगड़ीं तो वह ऊपर तक चमक गई थी। उनका वह एड़ियाँ चमकाने वाला पत्थर अब घिसने को आ गया है।”

मित्रो! जबसे अपने देस का चंद्रयान चाँद पर रवाना हुआ है, अपना देस ही नहीं, चंद्रलोक की एमडी साब की सुंदरी भी हमारे मिशन चाँद की सफलता की दिन रात कामना कर रही है। वह दिन-रात जागे-जागे सारे काम छोड़ दूरबीन से चंद्रयान को एकटक निहारती बस इस इंतज़ार में है कि कब जैसे उसका चंद्रयान रूपी एमडी साब पृथ्वी की परिक्रमा पूरी कर चाँद पर प्रवेश करे और वह उसके गले में सारी लोक-लाज त्याग वरमाला डाल उनके स्वागत के मंगलगीत गाने के बाद, अपने बेटे के साथ एड़ियाँ चमकाने वाला पत्थर ले निर्दयी एमडी साब से आ मिले, अपने बेटे को यह कहने कि- देख बेटा! ये रहे तेरे एमडी डैड!

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