काम करे मेरी जूत्ती

01-03-2025

काम करे मेरी जूत्ती

डॉ. अशोक गौतम (अंक: 272, मार्च प्रथम, 2025 में प्रकाशित)

 

देखिए राय साहब जी! अब मुझे काम करने को मत कहो। मैंने अब काम करना छोड़ दिया है। मेरे लिए अब काम हराम है। सरकार ने मुझे काम करने को मना किया है। सच कहूँ तो अब काम करने को मेरा मन ही नहीं करता। अब आप ही बताइए राय साहब! वो काम करे क्यों, जिसे मिल जाए यों? 

राय साहब जी! कमा कर खाने से अब मुझे अलर्जी होने लगी है। धन्य हो मेरी सरकार! बार-बार आए ऐसी सरकार! हर बार आए ऐसी सरकार! हज़ार बार आए ऐसी सरकार! जो काम करने वालों की जेब में डाका डाल हम जैसों को ठूँस-ठूँस खिलाए। मेहनत करता मर जाए तो मर जाए। 

जी राय साहब जी! अब तो अपने हाथ पर हाथ धरे खाने के दिन हैं। कमाने के दिन गए। पसीना बहाने के दिन गए। जब सरकार पुकार-पुकार कर मुझे सरकार आटा फ़्री में दे रही है तो मैं काम क्यों करूँ? मेहनत करें वे जिन्हें फ़्री के मिलने के दौर में भी मेहनत कर आटा खाने की बीमारी हो। काम करें वे जिन्हें मेहनत की आटे की चपातियाँ खाने में आनंद आता हो। मुझे तो मुफ़्त के आटे की चपातियाँ खाने में ही मज़ा आता है। 

जी राय साहब जी! देखो तो जब सरकार पुकार-पुकार कर मुझे दाल फ़्री में दे रही है तो मैं काम क्यों करूँ? मेहनत करें वे जिन्हें फ़्री के मिलने के दौर में भी मेहनत की दाल खाने की बीमारी हो। मेहनत करें वे जिन्हें मेहनत की दाल खाने में आनंद आता हो। मुझे तो मुफ़्त की दाल खाने में ही मज़ा आता है। मत पूछो राय साहब! मुफ़्त की दाल में कितना स्वाद होता है। 

जी राय साहब जी! देखो तो सरकार पुकार-पुकार कर पीने से लेकर नहाने तक को जितना मन करो उतना पानी फ़्री में दे रही है तो मैं हाथ पाँव क्यों हिलाऊँ? मेहनत कर पानी का बिल चुकाएँ वे जिन्हें फ़्री के मिलने के दौर में भी मेहनत का पानी पीने की बीमारी हो। अरे भैया! जब सरकार पानी फ़्री में दे रही है तो मेहनत कर पानी के बदले पसीना क्यों पिए जा रहे हो? मैं तो पानी का बिल चुकाए बिना नल के नीचे नंगे होकर नहाऊँगा जितना मन करेगा उतना नहाऊँगा। मुझे तो मुफ़्त के पानी में ही मज़ा आता है। मत पूछो राय साहब! मुफ़्त का पानी कितना शीतल होता है। 

जी राय साहब जी! सरकार पुकार-पुकार कर बिजली फ़्री में दे रही है तो मैं काम क्यों करूँ? बिजली का बिल चुकाने के लिए मेहनत करें वे जिन्हें फ़्री के मिलने के दौर में भी मेहनत कर बिजली जलाने की बीमारी हो। मेहनत करें वे जिन्हें मेहनत की बिजली से घर जगमग करने में आनंद आता हो। मुझे तो मुफ़्त की बिजली जलाने में ही मज़ा आता है। इसलिए दिन में भी बिजली जलाए रखता हूँ। मत पूछो राय साहब! मुफ़्त की बिजली जलाने से दिन को घर कितना जगमग होता है। 

देखो तो राय साहब जी! सरकार पुकार पुकार कर गैस सिलेंडर फ़्री में दे रही है तो मैं काम क्यों करूँ? मेहनत करें वे जिन्हें फ़्री में गैस का सिलेंडर मिलने के दौर में भी गैस का सिलेंडर ख़रीद कर रोटी पकानी की बीमारी हो। मेहनत करें वे जिन्हें मेहनत के सिलेंडर पर खाना बनाने में आनंद आता हो। मुझे तो मुफ़्त की गैस पर ही खाना बनाने में ही मज़ा आता है। मत पूछो राय साहब! मुफ़्त के सिलेंडर पर रोटी कितनी स्वाद बनती है। 

देखो तो राय साहब जी! सरकार पुकार-पुकार कर मुझे तन ढकने को कपड़ा फ़्री में दे रही है। मुझे तो सरकार से फ़्री में मिले कपड़े को ढकने में ही मज़ा आता है। मेहनत कर अपना तन ढकें वे जिन्हें फ़्री के मिलने के दौर में भी मेहनत करने की बीमारी हो। अरे भैया! सरकार जब कपड़ा फ़्री में दे रही है तो मेहनत क्यों करे जा रहे हो? ख़ून पसीना एक किए क्यों मरे जा रहे हो? अपनी नहीं तो सरकार की लाज तो रखो हे बेशर्मों! 

देखो तो राय साहब जी! सरकार पुकार-पुकार कर मुझे सिर ढकने को घर फ़्री में दे रही है। मुझे तो सरकार से फ़्री में मिले घर में पसरे रहने में ही मज़ा आता है। मेहनत कर अपना घर बनाएँ वे जिन्हें फ़्री के मिलने के दौर में भी इधर-उधर से लोन लेकर अपना घर बनाने की बीमारी हो। अरे भैया! सरकार जब घर फ़्री में दे रही है तो घर बनाने के लिए इधर उधर क्यों भटके जा रहे हो? मात्र एक छत के लिए ख़ून पसीना एक किए क्यों मरे जा रहे हो? अपनी नहीं तो सरकार की लाज तो रखो हे बेशर्मों! 

देखो तो राय साहब जी! सरकार पुकार-पुकार कर हम बीमारों का बुला-बुलाकर फ़्री में इलाज कर रही है। ऐसे में मेहनत कर अपने इलाज का बिल चुकाएँ वे जिन्हें फ़्री के मिलने के दौर में भी मेहनत करने की बीमारी लगी हो। अरे भैया! सरकार जब इलाज फ़्री में दे रही है तो दिन रात मेहनत कर क्यों बीमार हुए जा रहे हो? अपनी नहीं तो सरकार की लाज तो रखो हे बेशर्मों! 

जिसे सरकार इतना फ़्री में दे काम करे उसकी जूत्ती! अब तो मेरे मरने के बाद भी मेरे क्रिया कर्म के लिए सरकार ने फ़्री में कफ़न देने की घोषणा कर दी है। ऐसे में काम करें वे जिन्हें अपने मरे शरीर पर अपनी कमाई का कफ़न डलवाने की बीमारी हो। 

री बुधिया! तू बहुत बदनसीब थी जो सरकार के रेवड़ियाँ बँटने से पहले ही मर गई। तेरा क्या जाता जो बीमारी की हालत में ही सही ऐसी सरकारों के आने का तनिक इंतज़ार कर लेती। तब तेरा भी फ़्री में इलाज हो जाता। बिना इलाज मरना बहुत बुरी बात होती है बुधिया! इलाज करवाते-करवाते मरना सौभाग्य का सूचक होता है। अपने पंडित जी कहे हैं कि अपने मरने के पैसों पर तंत्र की मौज कराना मरने वाले को स्वर्ग दिलाता है। 

सुनो राय साहब जी! आपके राज में बहुत काम किया। पर किसीने काम करने का पैसा भी न दिया। काम करने के बाद जिससे भी मेहनताना माँगा उसीने दुत्कारा। अब तो बुधिया के मरने के बाद मैं और माधव एक ही छत के नीचे अलग अलग रह रहे हैं। माधव ने अपना अलग राशन कार्ड बनाया है तो मैंने अलग। दोनों को सरकार से इतना मिल जाता है कि हम उसमें से कुछ बेच भी देते हैं। 

हे सरकार जी! आप यों ही हमें फ़्री की रेवड़ियाँ बाँटते रहें। आप जहाँ कहेंगे हम वहीं वोट डालेंगे। आप एक कहोगे तो हम दस डालेंगे। अब हमें काम हराम हो गया है जी सरकार जी! 

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