शेविंग पाउडर बलमा
डॉ. अशोक गौतमएंकरः- तो दर्शकों अब पेश है हमारा मनोरंजनपूर्ण कार्यक्रम आज का डिबेट... आज के डिबेट का विषय है देश में बढ़ती बेरोज़गारी! जी हाँ! वह बेरोज़गारी जिसको लेकर जन्म से लेकर मरने तक देश में मारामारी है। ज़िंदे तो ज़िंदे, मरे भी जहाँ रोज़गार के लिए लाइनों में लगे हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने रोज़गार के सारे द्वार केवल अपनों के लिए खोल रखे हैं। सच्ची को पढ़े-लिखे लोग रोज़गार के लिए द्वार-द्वार मारे-मारे फिर रहे हैं। ....तो आज इस डिबेट में हमारे ख़ास मेहमान हैं सरकार की तरफ से रफीक जी और जनता की ओर से समाज सुधारक राम आसरे जी। आप दोनों विद्वानों का, मेहमानों का हमारे प्राइम टाइम के आज के मनोरंजनपूर्ण मुद्दे पर अपनी बात जनता के साथ साँझा करने के लिए इस चैनल पर बहुत बहुत स्वागत! आप जैसे विश्लेषकों, विशेषज्ञों की वज़ह से ही हमारा चैनल देश का नंबर एक चैनल बन पाया है।
(स्टूडियों में अपने-अपने बेरोज़गार थोबड़े कैमरे के आगे परोसते युवा जनता तलियाँ बजाते हैं।)
रफीक साहबः- शुक्रिया बागी मैम!
राम आसरे जीः- धन्यवाद बागी देवी जी! आपने हमें इस डिबेट के क़ाबिल समझा।
एंकरः- जी शुक्रिया! ये तो हमारा दुर्भाग्य सॉरी सौभाग्य कि आप जैसे सुलझे विचारक हमारे चैनल पर विराजे हैं। तो हाँ! राम आसरे जी! डिबेट आपसे ही शुरू करते हैं ....आप इनसे देश में बढ़ती बेरोज़गारी को लेकर क्या पूछना चाहेंगे? आप दिल खोलकर इनसे जो पूछना चाहे बेरोज़गारी के मुद्दे पर पूछिए ताकि बेरोज़गारी को लेकर जो जनता में संशय बना है वह साफ़-साफ़ उन तक पहुँचे।
रामआसरे जीः- तो रफीक जी! मैं जानना चाहूँगा कि देश में बढ़ती बेरोज़गारी को लेकर आपकी सरकार क्या कर रही है? देश में बेरोज़गारी के हालात बहुत संगीन हैं। पढ़े-लिखे तो पढ़े-लिखे, देश के करोड़ों अनपढ़ तक बरोज़गार हैं। आख़िर सरकार इस मुद्दे को लेकर क्या चाहती है कि ...
रफीक साहबः- देखिए बागी मैम! हमारी सरकार पर जो बेरोज़गारी को लेकर ताबड़तोड़ हमले किए जा रहे हैं वे सब देशद्रोहियों के जनता को बहकाने के सिवाय और कुछ नहीं। पर विपक्ष समझ ले! जनता इतनी उल्लू नहीं कि वह उनकी बातों में आ जाएगी। जनता हमारे साथ है। हमने जनता को जैसे-तैसे अपने साथ कर लिया है। वह हमसे सब कुछ जीत सकती है पर हमारी जनता फिलहाल हमसे नहीं छीन सकती। मेरे नालायक़ दोस्त का आरोप है कि हमारी सरकार देश के नौजवानों को रोज़गार देने में असफल रही है? तो मैं देश की जनता के सामने इस बात को स्पष्ट कर दूँ कि बेरोज़गारों की जो यह फौज आज तैयार हुई है। वह हमारी सरकार के समय में पैदा नहीं हुई। वह उनकी सरकार के समय पैदा हुई थी। और विडंबना देखिए! उनकी सरकार के समय में बेरोज़गार पैदा हुए आज हमारी सरकार से रोज़गार माँग रहे हैं? यह ग़लती उनकी सरकार की है। इस ग़लती के लिए उनकी सरकार ज़िम्मेवार है। अगर उस समय उनके पास रोज़गार समेत बच्चा पैदा करने की कोई स्पष्ट नीति होती तो आज यह समस्या पैदा न होती। यह समस्या उनकी सरकार की पैदा की है। हमारी सरकार तो निरंतर कोशिश कर रही है कि पिछली सरकारों के समय में पैदा हुए बेरोज़गारों को बिना किसी भेदभाव के रोज़गार दें। .... आप उनके समय के रोज़गार देने के आँकड़े उठाकर देख लीजिए। हमने अपने समय में पिछली सरकारों के समय में पैदा हुओं को उतने रोज़गार दिए हैं जितने अपने समय में पैदा हुओं को रोज़गार नहीं दिए। बदले में उन्होंने हमारे समय में पैदा हुए किसी एक को भी रोज़गार दिया हो तो बताएँ ये?
राम आसरे जीः- पर सर! पर सर!
रफीक साहबः- देखिए साहब! जब आपने हमारा मुँह खुलवा ही दिया है तो सुनने की भी हिम्मत रखिए। अब हमें बकने दीजिए... अब आपसे साफ़ करता चलूँ कि ये जो बेरोज़गारी है, ये हमारे समय की नहीं, सम्राट अशोक के समय की है। कहने को तो उन्होंने देश में बहुत विकास किया पर बेरोज़गारी पर उनकी कोई स्पष्ट नीति नहीं थी। उसका नतीजा ये हुआ कि देश में बेरोज़गारी बढ़ती गई। उसके बाद मुग़ल आए। उन्होंने भी हमारे देश को रोज़गार देने में कोई ठोस काम नहीं किया। बस, अपनों के बारे में ही सोचते रहे। उसका नतीजा ये निकला की देश में बरोज़गारी और बढ़ती गई। मुग़ल गए तो देश में अँग्रेज़ आए। उन्होंने हमारे लघु उद्योगों को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया, जिसका नतीजा यह निकला कि देश में बेरोज़गारी और बढ़ी।
राम आसरे जीः- पर रफीक साहब! हम तो आपके समय में देश में बढ़ी बेरोज़गारी की बात कर रहे हैं। हम जानना चाहते हैं कि...
रफीक साहबः- वही तो बता रहे हैं जनाब हम देश की जनता को, जो आप जानना चाहते हैं। जब अँग्रेज़ यहाँ से गए तो देश में बेरोज़गारी के सिवाय और कुछ न था। जिधर देखो बस, बेरोज़गारी! बेरोज़गारी! बेरोज़गारी! जनता बेरोज़गार! नेता बेरोज़गार! ढोर बेरोज़गार! डंगर बेरोज़गार! सब बेरोज़गार! पर हम जैसे मेहनत कर जैसे कैसे बेरोज़गारी से उबरे।
तो अब मैं आइने की तरह साफ़ कर दूँ कि हमसे पहले जितनी भी सरकारें आईं, उन्होंने रोज़गार के नाम पर देश को, बेरोज़गारों को आवेदन करने के पैसे ऐंठ ठगा ही। और अब हमारी सरकार ने....
राम आसरे जीः- तो आपकी सरकार अब बेरोज़गारों को लेकर क्या नया कर रही है? ज़िंदे तो ज़िंदे! बेरोज़गारी की चक्की में पिसकर मरे बेरोज़गार तक आपसे यह सवाल पूछना चाहते हैं?
रफीक साहबः- बहुत कुछ कर रही है। जो कर रही है, जल्द ही देश की जनता के सामने होगा! दिन-रात कर रही है। सारे काम छोड़ कर रही है। अपने सारे काम बंद कर और जो कुछ भी कर रही है, बस बेरोज़गारों के लिए ही कर रही है। अब सैंकड़ों सालों की बेरोज़गारी को ख़त्म करने में कुछ दशक तो लगेंगे ही। और ये साहब चाहते हैं कि....सरकार के पास कोई जादू की छड़ी नहीं जो....
एंकरः- ...तो दर्शको! इस गंभीर मुद्दे को आगे बढ़ाने से पहले अब हम लेते हैं एक छोटा सा कमर्शियल ब्रेक! उसके बाद भी आप हमारे साथ देश के सबसे गंभीर मुद्दे पर हो रहे ऐतिहासिक डिबेट में हमारे साथ बने रहिएगा। (शेविंग पाउडर बलमा! शेविंग पाउडर बलमा! संती, रिम्मी, कौर और सुषमा! सबकी पंसद सलमा। शेविंग पाउडर बलमा! शेविंग पाउडर......) लो जी! बिजली ही चली गई। अरे चुन्नू ! वो भ्रांति मार्च से बची मोमबत्ती तो लाना कहीं से ढूँढ़ कर।
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